
Garima Chaudhari
पहले ऐसा हमेशा होता था जब काम बिगड़ता या ज़िन्दगी उम्मीद के अनुसार नहीं चलती थी, मैं दूसरों को दोषी ठहराती अब भी ऐसा होता है आदत जो पड़ गयी है पर अपनी आदतों, कार्यों, विचारों इत्यादि पर ही तो काम करना है मुझे इन पर ईगो न चढ़ कर बैठा रहे इसीलिए तो उसे कम करने की दिशा में आगे बढ़ना है। अब दूसरों को दोषी ठहराते समय ही समस्या की जड़ें सीधे ईगो पर आकर खत्म होती हैं अर्थात् समस्या की वज़ह मैं हूं ये देख लेती हूं।















