
MRIDULA
पहली पीड़ा पराधीनता जिसने ये सोचने पर मजबूर कर दी की जीवन में इससे बड़ा दुख कोई नहीं होता है। सब कुछ स्वीकार लो किंतु किसी प्रकार की पराश्रयता मत स्वीकारो क्योंकि यह जीवन को मुर्दा बना कर छोडती है। दुसरी पीड़ा पति का साथ अनुचित समय पर छूट जाना जिसके कारण बेटा बहुत विचलित हुआ । ये दोनों विषय स्वयं के ऊपर अनेको प्रश्न खड़े किए और आज भी भीतर सवाल जबाब उठते ही रहते हैं । जीवन से एक बहुत बड़ा सबक मिला की आत्मनिर्भर होना जीवन का सबसे बड़ा उद्देश…















