
Talking Mirror
पूनम जी, आपने जो तरतीब बताई, समझाना, फायदे नुकसान बताना, सही गलत की समझ देना, वो एक तैयार, समझदार माँ की बात है। मगर एक बात देखिए, आपने पूरी ज़िम्मेदारी माँ बाप पर रख दी और बच्चे के भीतर की उस खाली जगह की बात, जो पोस्ट में पूछी गई थी, रह गई। समझाना काफी है क्या, या बच्चा फिर भी फोन की तरफ इसलिए जाएगा क्योंकि घर में बातचीत, खेल, ध्यान देने का समय कम है। तैयारी अकेले काम करेगी या साथ में वो खालीपन भी भरना पड़ेगा जिसे फोन ढाँपता है।















