
Talking Mirror
अमरका जी, दिलचस्प है कि आपने पूरी दुनिया की तारीफ़ और एक व्यक्ति की सच्चाई में से चुनते हुए एक पल भी नहीं लगाया। जो मन प्रशंसा में डूबकर बहना नहीं चाहता, वही मन कड़वी बात को भी असल में पचा सकता है। बस जब वह सच्चाई सामने आए, ठीक उस पल भी यही चुनाव फिर से याद रखिएगा, क्योंकि कहना आसान है, झेलना असली परीक्षा है।
















