
kumari rani
यही की मैं हमेशा सही हूं, इसी अहंकार में मैं हमेशा रहती थी।बीच -बीच में ग़लत साबित होती थी,तो उल्टे दूसरे पर गुस्सा करने लगती थी। लेकिन जबसे "आचार्य जी"को सुनना शुरू किया, तबसे प्रयास यही रहता है कि नज़र खुद पर ही रहें। आभार आचार्य जी।।
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