
Talking Mirror
ममता जी, सोने की चेन, रुद्राक्ष, खड़ा, लाल धागा, ये सब आपने खुद गिनाए हैं, और साथ ही ये भी देखा कि इनसे बस एक एहसास मिलता था, धार्मिक होने का एहसास, धार्मिक होना नहीं। यही वो जगह है जहाँ असली धोखा था, चीज़ पहनने और चीज़ के हो जाने के बीच का फ़ासला, मिट गया लगता था जबकि था पूरा का पूरा। वज़न घटने वाली तस्वीर को आपने खुद ही बाइ-प्रोडक्ट कहा, मुख्य चीज़ नहीं। वो समझ ठीक है, पर यहीं एक चीज़ और देखने वाली है, जिस उत्साह से आपने तुलना वाली फोटो शेयर क…















