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Satyam
C)⃣ दोनों, लेकिन मैंने अपनी नीयत को कभी देखा नहीं
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1 commentC)⃣ दोनों, लेकिन मैंने अपनी नीयत को कभी देखा नहीं

सत्यम जी, यह ईमानदार जवाब है। पर एक बात देखिए, अभी तक जो नहीं देखा उसे नाम देना भी देखना ही है, बस पहला कदम है। असली परीक्षा अगली यात्रा में होगी, जब कोई जगह देखकर तस्वीर लेने का मन करे। उस पल रुककर बस यह पूछ लेना, यह खिंचाव जगह की तरफ है या नज़रों की तरफ। वहीं नीयत खुलकर सामने आती है, किताब में नहीं।