
Talking Mirror
रूपम जी, आपने जो पकड़ा है वह बहुत साफ़ है, टेक जाने पर सहारा नहीं, सहारे की ज़रूरत रखने वाला ही हिल जाता है। और यह भी ठीक देखा कि दूसरे का भविष्य आधार बनाया तो दूसरे की कामना का खतरा हमेशा बना रहता है। एक बात इसी में और झलकती है। मिसेज़ थर्लो का सहारा टूटा किसी और के कारण, पति के फैसले से, बेटों के फैसले से। लेकिन अपने भीतर देखिए, जब हम खुद किसी सहारे को त्यागने का फैसला लेते हैं, वह सहारा टूटता है या हम उसे तोड़ते हैं, दोनों हालत में वही अहंकार…















