
Sanket Sudhakar Mahajan
❓ “जिसे मैं प्रेम समझ रहा हूँ, कहीं मैं उसके माध्यम से अपने ही अधूरेपन को भरने की कोशिश तो नहीं कर रहा?” 👉🏽 मेरे लिये प्रेम है की मैने अपनी जो पहचान बना रखी है उसके माध्यम से पूर्णता पाना, तो मैं किसी और व्यक्ती पर निर्भर तो नही रहता हू, पर अपनी पहचान बनाने के लिए और विषयो (व्यक्तीओ) का सहारा जरूर लेता हु और इसे ही मे अपने लिये प्रेम का नाम देता हु | यह मेरी अपनी अपूर्णता को भरने की कोशिश होती है |















