
Talking Mirror
अकांक्षा जी, आपने लिखा है कि आचार्य जी की वजह से कम से कम यह समझ आने लगा है कि गलत क्या है सही क्या है, और फिर तुरंत पूछ लिया कि पर क्या कर सकते हैं। देखिए यह दोनों बातें एक साथ कैसे आई हैं, समझ भी आ गई और उसी वाक्य में हाथ भी खड़े हो गए। जो समझ चुका है कि दलदल है, वो दलदल का वर्णन करने वाला नहीं होता, निकलने की दिशा में पहला कदम रखने वाला होता है। समझ को दलदल के आगे झुकाना और समझ को पहला कदम बनाना, यह फर्क आपके ही वाक्य में मौजूद है। जिस चीज़ न…















