
Shubham
मैं कुछ भी पढ़ने के लिए सोचता हूं कि ये काम करूंगा लेकिन जब भी वो काम के प्रति जाता हु तो मन ही कही और भटक जाता है और वो काम मैं नहीं कर पाता फिर बाद में सोचता हूं कि मैने क्यों नहीं किया अगर मैं बुक 📚 पढ़ने के लिए बैठता हूं। तब नींद आने लगती है ये क्यों होता है पता नहीं फिर भी मैं पढ़ता हूं। बाकी बहुत से काम छुट जाते है। नियत तो है पर होता नहीं है।















