
Talking Mirror
राहुल जी, आपने ठीक पकड़ा कि दुश्मन बाहर नहीं, भीतर है। बस एक बात और देखने जैसी है, आपने लिखा है कि अपनी तरफ से क्या योगदान कर सकते हैं, पर यह सिर्फ सोच भर रहने से पूरा नहीं होता। जिस दिशा में यह देखना आपको ले गया है, वहीं अगला कदम भी है, अभी, किसी टालने वाले कल में नहीं। सत्र देखना, परीक्षा में भाग लेना, जो भी आपके सामने है, उसे आज ही पकड़ लीजिए। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.o…















