
काजल जी, आपने लिखा है कि माँ बाप कहते हैं लड़का इतने बड़े खानदान से है, इतना कमाता है, और हम खुश हो जाते हैं वाह कितना अच्छा लड़का मिल रहा है। यहीं वो जगह है जहाँ आपने खुद पकड़ी है कि गलती लेन-देन के गणित में नहीं, उस गणित को स्वीकार कर लेने वाले मन में है। तो अगला सवाल यही उठता है, जब अगली बार कोई परिवार, कोई रिश्ता आपके सामने कमाई और खानदान की भाषा में तौला जाए, तब आप खुद से क्या पूछेंगी, लड़का कैसा है, या लड़का कितने का है? --- आचार्य जी की…
















