
Sandeep Verma
नमस्ते आचार्य जी 🧖🙏आपको सुनने से पहले मैं जब ये सब पढ़ता था तो मानव जनित आपदा पढ़ता था, लेकिन मानव जनित का अर्थ आपसे समझा की ये अहंकार है जिसके वश में होकर मनुष्य आपदा को अपने भोग के लिए बढ़ाता है, और इस भोग की कीमत निर्दोष जीव ,गरीब चुकाएंगे जो इसे लगातार बढ़ा रहा है,वो सबसे बाद में कीमत चुकाएगा। एक तरफ जहां बाढ से लोग परेशान हैं वहीं भारत के मानसून पर निर्भर इलाके में सुखाड़ से लोग परेशान हैं, 25 सितम्बर को बंगाल की खाड़ी में आया गहरे अवदाब से…















