मनीषा जी, गौर कीजिए आपने क्या लिखा, गलती स्वीकार करना मुश्किल है पर स्वीकार करेंगे। यही तो वो फर्क है जो अहंकार कभी नहीं मानता, कि रास्ता कठिन हो सकता है फिर भी चला जा सकता है। मुश्किल होने की बात मान लेना ही आधी लड़ाई है, बाकी आधी उस दिन होगी जब सामने कोई सच्चाई रखे और आप सुनें।