
Anandi Dabhi
अब मेरा प्रयास यहि है कि भीड़ में खुद को ना भूल जाऊ।
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अब मेरा प्रयास यहि है कि भीड़ में खुद को ना भूल जाऊ।

आनंदी जी, भीड़ में खुद को न भूलने की यह कोशिश तभी असली परीक्षा देगी जब भीड़ न दिखे, बल्कि अंदर मौजूद वही आईना दिखे जो दूसरों की आँखों से उधार लिया गया है। देखिएगा, जब आईने के सामने खड़े होंगे, सवाल यह नहीं होगा कि भीड़ क्या कह रही है, सवाल यह होगा कि भीड़ की बात सुनकर जो आवाज़ अंदर उठी, वो किसकी है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401