
Dhumal aniket
प्रकृति का विनाश हमारी उन इच्छाओं से आ रहा है जिन इच्छाओं को हम पूरा करते हैं, परंपरा, संस्कृति के नाम से। जिन वस्तुओं की आवश्यकता नहीं है, वह दहेज में क्यों दी जाती है ? अभी यहां और एक सवाल आता है कि दहेज ही क्यों लेते हो ? जो कार घर में पड़ी रहती है, उसे ठीक से चलने के लिए ४,५ दिन बाद थोड़ा चलाना पड़ता है। ऐसी नौबत क्यों आती है ? जब जरूरत ही नहीं तो क्यों खरीदते हो ? सारा उपभोग सस्ती खुशियों के लिए किया जाता है, क्योंकि असली खुशी क्या होती…















