
Dhawal bhavi chandra
आज हर व्यक्ति इसी जद्दोजहत में लगा है कि कैसे भी अपना भविष्य निश्चित कर ले अपने बच्चों का भविष्य निश्चित कर ले क्योंकि डर साथ साथ चल रहा है कि निश्चित हो जाएगा तो सुविधाएं होंगी आराम होगा सुख होगा,नहीं तो दुःख मिलेगा ठोकरें मिलेंगी असुविधा होगी ,परन्तु हम ये तो भूल ही जाते हैं कि निश्चित तो कुछ भी नहीं है भविष्य तो बिल्कुल भी नहीं, जो है वर्तमान है। हम भविष्य निश्चित नहीं कर सकते पर वर्तमान में क्या करना है क्यों करना है और इसका उद्वेश्य सही है…















