
Archana Baghel
परिस्थिति बदलते ही पसंद बदल जाए तो यह मेरी पसंद नहीं है। बाहर से देख के सीखा हुआ पसंद है जो कि एकदम नकली है। पर इसका आभास जरा भी नहीं होता कि जिसको हम अपना कह रहे होते हैं वह अपना होता ही नहीं हमारे अंदर डाला गया होता है। आज के स्थिति में बिल्कुल अलग है मेरे साथ। यह समझना आया की हर पसंद मेरी अपनी नहीं है और जो पसंद है वह परिस्थिति के अनुसार बदलेगा भी नहीं।















