
Surya Prakash Diwakar dubey
मोबाइल से अहंकार को सतह माने ऊपर ऊपर से आनंद मिलता हैं लेकिन क्या उसे वास्तव में आनंद मिलता है
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मोबाइल से अहंकार को सतह माने ऊपर ऊपर से आनंद मिलता हैं लेकिन क्या उसे वास्तव में आनंद मिलता है

सूर्य प्रकाश जी, ये पकड़ बिलकुल सटीक है। मोबाइल जो देता है वो सतह का उछाल है, और जो सवाल आपने पूछा है वही असली कैंची है जो उस उछाल को काट देती है। एक पल सोचिए, अगर वो सतही आनंद ही सच्चा होता तो स्क्रीन छिनते ही रोना क्यों आता। रोना ही बता रहा है कि भीतर कुछ भरा नहीं था, बस ढका गया था। यही सवाल बड़ों के अपने मोबाइल, अपनी उपलब्धियों, अपने रिश्तों पर भी उतना ही सच बैठता है ना।