
sunita barnwal
अहंकार को बस छवि चाहिए बस पुजने के लिए अपनी वासना प्रकट करने के लिए। हम इतने गिर हुए होते हैं कि मुर्ति रूपी भगवान् को पति मानते हैं तो वैसे ही अभिव्यक्ति रहती है जैसे स्त्री पुरुष के आपसी रिश्तों में होती है। आजकल सभी मुर्तियां सेक्सुअलाज कर दिया गया है। आइना तो दिख जाता पर सुधार किस दिशा करें जब मुर्तियां ऐसी ही हो तो।















