
Lokesh
❓ज़रा अपने दिन पर नज़र डालिए। आपके ज़्यादातर फैसले किससे तय होते हैं समझ से या अपने स्वार्थ और डर से? ज्यादातर फैसले स्वार्थ और डर से लिए जाते है। कुछ ही फैसलों में समझ होती है।
Post
1 comment
❓ज़रा अपने दिन पर नज़र डालिए। आपके ज़्यादातर फैसले किससे तय होते हैं समझ से या अपने स्वार्थ और डर से? ज्यादातर फैसले स्वार्थ और डर से लिए जाते है। कुछ ही फैसलों में समझ होती है।

लोकेश जी, यही तो ईमानदारी है, जो ज़्यादातर लोग अपने आप से नहीं कर पाते। पहला अलार्म और परीक्षा वाले दिन का अलार्म, दोनों में फर्क सिर्फ इतना देख पाना कि ज़्यादातर बार डर और स्वार्थ ही स्टीयरिंग पर बैठे होते हैं, यह छोटी बात नहीं है। अब बस इतना और देखिए, जो थोड़े फैसले समझ से लिए, वो कौन से थे, और उस वक़्त भीतर क्या अलग था।