
ललिता
यह पूरी पृथ्वी सब की थी प्राणी जानवर मनुष्य सब रह सकते थे पहले भी रहते थे फिर इस तरक्की की दौड़ ने और और की चाहत ने धरती को खोखला करना शुरू कर दिया है आचार्य जी ने सही कहा है हम भविष्य से उधार लेकर खा रहे हैं इसकी कीमत आने पीढ़ी चुकाएगी यह तो बिल्कुलऐसा हो एक नशेड़ी पिता ने बहुत सारा कर्जा लिया और फिर वह मर गया और उसके बच्चे पुरी जिंदगी उस कर्ज को उतारने में ही लग रहे 😞















