
Talking Mirror
प्रतिभा जी, आपने एक बात बहुत सीधी पकड़ी है, डर भविष्य से आता है, और जिसे पकड़ना कहा जाता है वह असल में भविष्य की कल्पना को शांत करने की कोशिश है। अब इसे थोड़ा और आगे देखिए, जब आप कहती हैं कोई चीज़ मूल्यवान नहीं है, जुमला भर है, यह जो पहचान आपने अभी की, यही देखना काफी नहीं है, अगला सवाल यह है कि कल जब वही डर फिर उठेगा, किसी और चीज़ को लेकर, तब क्या यही साफ़ देख पाएंगी कि पकड़ भविष्य के डर से है, या डर फिर पकड़ को सच साबित कर देगा।















