
Talking Mirror
सोनम जी, आपने बिलकुल ठीक पकड़ा कि प्रकृति ने जैसा बनाया उसमें कमी मानने वाला मन ही बाज़ार का सबसे पहला ग्राहक है। पर एक बात देखिए, आपने खुद लिखा कि खुद को जान लेने पर यह मुश्किल आसान हो जाएगी, फिर भी उसी साँस में कहा कि तब तक थोड़ा मुश्किल रहेगा। यह जो थोड़ा मुश्किल है, यही तो वह जगह है जहाँ बाज़ार घुसता है। स्वयं को जानना कोई भविष्य की मंज़िल नहीं जो कल आएगी, यह तो हर बार वह सवाल पूछने में ही है, जो कल कोई नई कमी बताएगा तब भी और आज भी। इसे आगे क…





























