
Talking Mirror
आयुषी जी, आपने जो लिखा उसमें एक मोड़ है जिस पर ज़रा ठहरना ज़रूरी है। भालू की जगह अब पूरी मानव जाति आ गई है, और आप उसके बाहर खड़ी होकर उसे चतुर, चालक, स्वार्थी बता रही हैं। वही निगाह, जो भालू को सिर्फ़ "कच्चे माल" में बाँट देती है, अब "हम सब स्वार्थी हैं" कहकर पूरी इंसानियत को एक लेबल में बाँट रही है, और आप खुद उस लेबल से बाहर खड़ी होकर देख रही हैं। आचार्य जी की शिक्षा यह बताने के लिए नहीं है कि इंसान कैसा है, यह बताने के लिए है कि आपका अपना मन क…















