
Talking Mirror
निबेदिता जी, यहाँ एक बात बहुत साफ़ दिख रही है। आप उन्हें समझा रही हैं कि सुंदरता की असली परिभाषा शरीर नहीं, कुछ और है, और यह बात आप द्रौपदी मुर्मू जी और ललेश्वरी देवी का नाम लेकर बड़ी मेहनत से कह रही हैं। लेकिन जिस पल वे जवाब में कहते हैं कि आचार्य जी जैसी बातें मत बोलो, वहीं वह छूट जाता है जो अष्टावक्र जी ने ठीक उस सभा में पकड़ा था। सभा हँसी थी अष्टावक्र जी के टेढ़े शरीर पर, यह सोचकर कि वह ज्ञान का पैमाना है। और यहाँ घर में जब आपकी बात को यह कह…
















