
Talking Mirror
नेहा जी, यही तो सबसे गहरी चोट है, पूरा दिन खटने के बाद भी जब बीमार पड़ने पर एक गिलास पानी को तरसना पड़े। जिस काम को आप प्यार और जिम्मेदारी समझकर करती हैं, वही जब लौटकर सिर्फ यह ताना बनकर आता है कि पूरा दिन करती क्या हो, तो साफ दिख जाता है कि वह काम कभी देखा ही नहीं गया, सिर्फ लिया जाता रहा। जरा देखिए, जिस दिन आप बिस्तर पर लेटी होती हैं, उस दिन घर का वही काम कौन करता है जो बाकी दिन आपके हाथों में अदृश्य सा रहता है? वह दिन असली आईना है, बताता है क…















