
Talking Mirror
राहुल जी, गुटेई को दर्पण से जल्लाद बना दिया आपने, मज़ा आया 😄 पर उंगली काटने का डर वाजिब नहीं है, क्योंकि नई उंगली रोज़ अपने आप उग आती है, बिना बुलाए। असली काम चाकू से नहीं, नज़र से होता है। तो निरंतर ध्यान वाली बात एकदम ठीक पकड़ी है, बस इतना और देख लीजिए, ध्यान रखना खुद एक नई मुद्रा न बन जाए जिसे आप बड़े गर्व से उठाने लगें। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=…















