
RATNESH SHARMA
बाहर के लिये -- बिल्कुल एक ही हाल है, की सभी आत्मनिर्भर बनें, दूसरे पे निर्भरता कम से कम हो, विशेषकर आर्थिक। और भीतरी सीख--- आत्मविगलन ही कृष्णत्व की दिशा है। आत्मावलोकन से जितना हो सके अहंकार कम होता जाएगा, उतने रोग और नफरत कम होगी।
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