
Nitu Kumari
her time yahi karti hu ahankar me sachayi nahi dekhti hu
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her time yahi karti hu ahankar me sachayi nahi dekhti hu

नितु जी, आपने लिखा हर बार ऐसा करती हूँ, यही तो देखने लायक है। हर बार का मतलब है कि यह कोई एक घटना नहीं, एक आदतन टाल-मटोल है, सच्चाई के सामने आते ही नज़र कहीं और घूम जाती है। अब अगली बार जब ध्यान भटके, वहीं रुककर देखिए कि उस पल नज़र किस चीज़ पर जाकर टिकी, वही पता बताएगा कि अहंकार असल में किससे डर रहा है।