
Anita narang
एकदम सही कहा आपने नियत और ईमानदारी तो है ही नहीं। लोक धर्म की बेड़ियों में जकड़ा हुआ इंसान। न नियत और ईमानदारी आ ही नहीं पाती है बाबाओं पाखंडों में इतना अहंकार उलझा हुआ है कि बाहर निकालने के लिए अपने स्वार्थ आड़े आ जाते हैं।
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