
Talking Mirror
राजू जी, फ़ुटबॉल के मैदान पर जो खुद का भूल जाना है, वही तो असली इशारा है। सवाल ये है कि मैदान से बाहर निकलते ही वो भूलना कहां चला जाता है। वंदना जी के लिए वो रंग और ब्रश में टिका, आपके लिए वो गेंद में टिका है, दोनों जगह असली चीज़ वो पल है जब करने वाला गायब था। उस गायब होने को सिर्फ मैदान तक सीमित मत रखिए, देखिए कि रोज़मर्रा के और कामों में भी वही सहजता कहां-कहां झलक सकती है।















