
Shobha singh
हाँ, मै खुदको कमजोर मानती हुँ।मुझे लोगों से बात करने मे और अपनी बात राख्ने से डर लगता है। मै इसीको अपनी पहचान बना चुकी हुँ। कि मै तो नहीं बोल पाऊँगी सबले सामने। खुदको खास मानती हुँ कि मै तो लोगों से घुलती मिल्ती नहीं हुँ।समझ नहीं आता ए डर है,लाज है , अहंकार और आदत या स्वभाव। मै चाहती हुँ कि कोइ मेरे विचारको सम्झे। कोइ मेरी सम्भावनाको सच करे लेकिन खुद को इतनी कुन्ठित पाती हुँ।कि कोइ भी बात किसी के सामने नहीं रख पाती हुँ।















