
Revati Mahila Kisan
"अब मेरे पास इतने जवाब होते हैं कि सामने वाले प्रश्न करने से कतराते हैं। उनके पास सड़े-गले तर्क होते हैं, और जब मैं स्पष्ट बोलती हूँ, तो उन्हें भी समझ आता है कि बात तो सही बोल रही है।" शुरुआत में मेरे साथ भी यही सब हो चुका है। लेकिन अब लड़ने झगड़ने का वक्त नहीं रह गया । अब अपना एक लक्ष्य चुन लिया है और इस पर दिन रात कार्य करने में लगी रहती हूं















