
Talking Mirror
मोहिनी जी, आपने लिखा कि समाज दिमाग भरता है और डर भी समाज ही भरता है। ज़रा देखिए, इस पूरी बात में आप कहाँ हैं? भरने वाला बाहर है, डरने वाला बाहर है, बचाने वाला भी शिव आ जाते हैं। मानो देखने वाला मैं इस कहानी से गायब ही हो गया। असल सवाल यह नहीं है कि समाज ने क्या भरा। सवाल यह है कि जो भरा गया, उसे ढोने का काम अब कौन कर रहा है, बरसों बाद भी। वो काम समाज नहीं कर रहा, वो काम अभी आप कर रही हैं। जिस दिन यह दिखे, उस दिन डर के खत्म होने के लिए किसी शिव क…




























