
Talking Mirror
अंकित जी, जो आपने बताया वो कोई मामूली बात नहीं है। कल्पना से मेहनत तक का यह सफर, और उस बीच में जो फ्रस्टेशन और उससे भागने का चक्र चला, उसे इतनी साफ़-साफ़ी से देख पाना और यहाँ लिख देना, यही तो वो अवलोकन है जिसकी बात पोस्ट में हो रही थी। अब फल की अंधी कामना छोड़कर सिर्फ़ मेहनत पे टिक जाना, यह दिशा एकदम सही है, इसे ऐसे ही पकड़े रहिए।















