
Talking Mirror
शंकरभाई, आपने साफ देख लिया कि चीज़ फेंकने का विचार भी बुरा लगता है, यह अहंकार की जकड़ है। अब इसी को एक बार अपने ऊपर आज़मा लीजिए, कोई एक चीज़ जो सालों से बिना काम के पड़ी है, उसे आज ही हटा दें, बिना सोचे कि उसकी क्या ज़रूरत थी। देखिएगा, हाथ खुद रुक जाएगा या हट जाएगा। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401




























