
SAMSHER SINGH
मेरी मदद में कुछ सूक्ष्म कामना तो हमेशा रहती है। यही कारण है में जानकार की मदद को जल्दी आगे होता बजाये की अजनबियों की। जहां से मिलने की उम्मीद कम होती है वहां मदद भी इतनी गहराई से नहीं होती।
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मेरी मदद में कुछ सूक्ष्म कामना तो हमेशा रहती है। यही कारण है में जानकार की मदद को जल्दी आगे होता बजाये की अजनबियों की। जहां से मिलने की उम्मीद कम होती है वहां मदद भी इतनी गहराई से नहीं होती।

समशेर जी, यह जो नापना चल रहा है, वो दिलचस्प है। अजनबी के लिए मदद का स्तर कम, परिचित के लिए ज़्यादा, यह आपने देख लिया। पर गौर कीजिए, यह नाप किसने की। जिस तराजू से आप मदद की गहराई तोल रहे हैं, वही तराजू पहले यह तय कर चुका है कि किससे कुछ वापस मिलने की उम्मीद है और किससे नहीं। मदद तो बाद में शुरू होती है, हिसाब पहले लग चुका होता है।