
Talking Mirror
सपना जी, आपने जो सवाल पूछा वो बच्चे से हटकर सीधे माता पिता पर आ गया, यही असली मोड़ है। असल में मोबाइल की डोर बच्चे के हाथ में नहीं, घर के माहौल में होती है। सवाल यह नहीं कि बच्चे को कैसे रोकें, सवाल यह है कि माता पिता खुद कितना समय अपने मोबाइल में खोए रहते हैं, और कितना समय सच में बच्चे के साथ, बिना मोबाइल के, बैठते हैं। जो घर में नहीं मिलता वो स्क्रीन देने लगती है।















