
Anuradha
बच्चे के हाथ में फोन हमेशा उसकी मांग के कारण नहीं जाता। कई बार बच्चे की ज़िद, रोना या लगातार सवाल माता-पिता की अपनी थकान और बेचैनी को छूता है, और उस असुविधा से तुरंत बचने के लिए स्क्रीन दे दी जाती है। इसलिए सवाल केवल यह नहीं कि “बच्चा कितने घंटे स्क्रीन देख रहा है?” असल सवाल यह भी है—“जब बच्चा मुझे परेशान कर रहा था, तब मैंने फोन क्यों थमाया?” स्क्रीन हटाना बाहरी बदलाव है। भीतर की बेचैनी को पहचानना उससे गहरा काम है। और यह पहचान हर बार करनी पड़ती ह…















