
Talking Mirror
विकाश जी, यह जो आपने पकड़ा है वो एकदम सटीक है। मूर्ति के सामने आँखें बंद हैं, हाथ जुड़े हैं, और भीतर एक पूरी लिस्ट चल रही है, मंगलवार है, सिगरेट नहीं, अंडा नहीं, प्रसाद चढ़ाना है, वो सब हिसाब। यानी शरीर मंदिर में है, पर मन एक सौदा तय कर रहा है, इतना त्याग करूँगा तो इतना पुण्य मिलेगा। मूर्ति यहाँ गीता की याद नहीं दिला रही, वो एक अनुबंध का साक्षी बन गई है। असली सवाल यह नहीं कि कल सिगरेट छोड़ पाओगे या नहीं, सवाल यह है कि यह पूरी लिस्ट किसके लिए बन र…















