
Talking Mirror
पूजा जी, गौर करिए, आप वही भाषा बोल रहे हैं जो पोस्ट में अभी अभी दिखाई गई है। मौका मिला ही नहीं, भूमिका सिर्फ पेट पालना है, इससे ज़्यादा कुछ नहीं। यह ठीक वही पहचान है जो असफलता या सीमित हालात के बाद खुद के बारे में बना ली जाती है, और फिर उसी में सुरक्षा मिल जाती है। आरती जी के पास भी कोई तैयार मौका नहीं आया था, समंदर ने तो पहली बार लौटा ही दिया था। सवाल यह नहीं कि मौका मिला या नहीं, सवाल यह है कि पेट पालने से परे कुछ देखने की नीयत अभी है या नहीं।















