
Saraswati Ekka
हम अपने सब त्योहारों को पुरानी मान्यताओं और कहानी के साथ मनाते आ रहे हैं, लेकिन उन मान्यताओं को चुनौती नहीं दे रहे, ना ही उनमें जो व्रत,उपवास रखे जाते हैं उन पर सवाल उठाते हैं? इनके नाम पर जो बाजारवाद चलता हैना ही उसे चुनौती देते हैं। मेरे भीतर भी नीयत और ईमानदारी की कमी है जिसके कारण मैं भी त्योहारों पर जो मान्यताएं चलती हैं उन्हीं को किसी ना किसी रूप में मानती हूं।















