
Satwik Verma
धन्यवाद यह साझा करने के लिए । मुझे इसमें एक और चीज़ अनुभव होती है , कि वो सही चुनाव बार बार करना अपने आप में भीतर एक स्थिति का द्योतक होता है और वह स्थिति यह है कि मैंने देखा है मैं कैसा हूँ और मैं यह रोज़ रोज़ पल पल देखता हूँ कि मैं कैसा हूँ । जब मैं सत्र सुनता हूँ तो मुझे एक फासला दिखाई पड़ता है इसमें की "मैं क्या बना बैठा हूँ" और "मैं क्या हो सकता हूँ । ये फासला मुझे मेरे रोज़मर्रा के जीवन की बेईमानियां , घुटने टेकना , सब कायरता भरे या मोहग्रस्त…















