
kumari rani
परिस्थिति को भी हम मौके कि तरह लेते हैं,ताकि हमें बने बनाए रास्तों पर चलने की सहूलियत बनी रहें। और ये भी कह सकें कि हमारे साथ तो परिस्थिति ही ऐसी थी, मैं क्या करतीं। यही धारणा कि जो जैसा है वैसा ही रहे,जो मिल रहा है उसी में संतुष्ट रहो। सीमाओं का उलंघन करने पर उसकी कीमत चुकाने का सामर्थ्य का अभाव। पिंजरा को ही स्वतंत्रता मानना।















