
Bhanmati sahu
मुझ से तो अपने घर की परंपरा नहीं निभाई जाती हैं एक बार से दोबारा नहीं हो सकता हैं क्योंकि ग़लत हो रहा है एक ही बार में दिख जाता हैं। मेरे घर वाले ही कहते है कोई नियम और परंपरा को मानती नहीं है बहुत सुनाते हैं मैं अनसुना कर के निकल जाती हूं जब उन लोग मेरा नहीं सुनते हैं।















