
हा मै भी इस भटकाव का शिकार हू। पर ये भटकाव अंदर बाहर दोनों है। पढ़ते वक़्त कभी किसी टॉपिक को गहराई से जानने के लिए फोन उठाया, और उसे सर्च करके उसे गहराई से जानने का प्रयास किया। और इसके बाद ही इस भटकाव का शिकार हो जाता हू, जब स्क्रीन स्क्रॉल करके कोई नोटिफिकेशन देखता हू। फिर समय कितना तेजी से निकल जाता है, पता नहीं चलता और बाद में खुद पर ही गुस्सा होता है पर आचार्य जी से जुड़ने के बाद परिवर्तन आया
















