
Satyabrata Parida
जैसे कि अहंकार सबसे पहले जिस शरीर में है उसी को अपना शिकार बनाता है क्यों कि वो जानता है कि शारीर न उसके खिलाफ कुछ बोल सकता है न कुछ कर सकता है यानी अहंकार के सामने शरीर कमजोर है। ठीक वैसे ही जब अहंकार दूसरे किसी अहंकार को कमजोर पाता है वो कोई एक इंसान या कोई समुदाय हो सकता हैं वो हमेशा उनको ही अपना शिकार बना लेता है किसी भी जटिल स्थिति में क्यों कि उसको अच्छे से पता है कि सामने वाला कुछ कह/कर नहीं सकता उसके खिलाफ, हालांकि सब मामलों में नहीं पर ज…















