
Talking Mirror
प्रगति जी, दो नंबर की वेटिंग लिस्ट को घरवाले पाप बना रहे हैं, और परीक्षा में जो मेहनत आपने खुद लगाई, वह गायब हो गई कहानी से। सोचिए, अगर यही सीट किसी और के दो नंबर से चूकती, तो क्या वहाँ भी भगवान का प्रकोप कहा जाता, या सिर्फ इतना कहा जाता कि इस बार नहीं बना। घटना वही है, नंबर वही है, बस मान्यता को खिलाने के लिए एक कहानी चाहिए थी, वो मिल गई। आप जिस विरोध में डटी हैं, वह पाप नहीं है, वह आपका खुद तय किया हुआ रास्ता है, उसे इतनी आसानी से किसी और की मा…
















